बिहार में किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू होगी। बाढ़ या आपदा के समय फसल बर्बाद होने पर मुआवजा दिया जएगा। यह योजना सहकारिता विभाग चलाएगा। इसका उद्देश्य किसानों की आर्थिक समस्या को दूर कर नई फसल के लिए सहायता देना है। यह पहल आपदा के समय किसानों को राहत और उनके आजीविकी स्रोत को सुरक्षित रखने की दिशा में सशक्त कदम है। यह योजना सितंबर 2025 से शुरू होगी। इसके लिए केंद्रीय टीम बिहार में दौरा कर चुकी है।
फसल बीमा की क्या योजना है?
बिहार में मानसून के दौरान अधिकांश जिलों में बाढ़ आती है। इसकी वजह से किसने की हजारों एकड़ में लगी फसल पानी में डूबकर बर्बाद हो जाती है। भुखमरी की स्थिति के साथ ही अगले सीजन में फसल की बुवाई के पैसे भी किसानों के पास नहीं रहते हैं। इसी वजह से कई बार किसान गेहूं , जौ ,चना, सरसों ,मटर ,अलसी, रवि फसल की बुवाई नहीं कर पाते हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से किसानों को फसल का पैसा मिलने के साथ ही बुवाई को लेकर प्रोत्साहन भी मिलेगा।
बिहार में सितंबर 2025 से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू होने जा रही है। आपदा के समय फसल खराब होने पर किसानों को 15,000 से 20,000 तक मुआवजा मिलेगा। जानिए योजना की पात्रता, लाभ और आवेदन की प्रक्रिया।
योजना का उद्देश्य
बिहार में बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं के समय किसानों को आर्थिक राहत देने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) की शुरुआत की जा रही है। इसका संचालन सहकारिता विभाग करेगा। योजना का मुख्य उद्देश्य बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा देकर किसानों को अगली फसल की बुवाई के लिए सक्षम बनाना और उनकी आजीविका को सुरक्षित रखना है।
क्यों ज़रूरी है यह योजना?
बिहार के अधिकांश जिलों में मानसून के दौरान बाढ़ की वजह से हजारों एकड़ फसल बर्बाद हो जाती है। इससे किसानों को न सिर्फ आर्थिक क्षति होती है, बल्कि अगली फसल की बुवाई के लिए बीज, खाद और अन्य संसाधनों की कमी हो जाती है। गेहूं, चना, मटर, सरसों, अलसी जैसी रबी फसलों की खेती रुक जाती है। ऐसे में यह योजना किसानों के लिए संकटमोचक साबित होगी।
योजना में कितना मुआवजा मिलेगा?
फसल क्षति की स्थिति मुआवजा राशि (प्रति हेक्टेयर) अधिकतम मुआवजा (2 हेक्टेयर तक)
20% तक फसल नुकसान ₹7,500 ₹15,000
20% से अधिक फसल नुकसान ₹10,000 ₹20,000
लाभ लेने की प्रक्रिया
ऑनलाइन या CSC केंद्र पर आवेदन करें।
राजस्व विभाग या कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार क्षति का आंकलन होगा।
कृषक रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है।
बैंक खाता व आधार कार्ड की जानकारी देना आवश्यक है।
बीमा राशि सीधे किसान के खाते में ट्रांसफर की जाएगी।
योजना कब से लागू होगी?
यह योजना सितंबर 2025 से पूरे बिहार में लागू की जाएगी। इसकी तैयारी के लिए केंद्रीय टीम ने राज्य का दौरा भी किया है। शुरुआत में इसे उन जिलों में लागू किया जाएगा जहां बाढ़ की संभावना अधिक होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. यह योजना कब से शुरू होगी?
योजना सितंबर 2025 से लागू होगी।
2. अधिकतम कितने हेक्टेयर तक मुआवजा मिलेगा?
अधिकतम 2 हेक्टेयर की फसल के लिए मुआवजा मिलेगा।
3. योजना के लिए कौन पात्र होगा?
वही किसान पात्र होंगे जिनकी फसल प्राकृतिक आपदा में कम से कम 20% या उससे अधिक क्षतिग्रस्त हुई हो।
4. आवेदन कैसे करें?
किसान ऑनलाइन पोर्टल या नजदीकी CSC केंद्र से आवेदन कर सकते हैं। बिहार सहकारिता विभाग के आधिकारिक वेबसाइट, https//esahakari.bihar.gov.in पर जाकर आवश्यक दस्तावेज के साथ आवेदन किया जा सकता है। इसके लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके आप आवेदन कर सकते हैं।
5. यह योजना किन फसलों पर लागू होगी?
गेहूं, चना, मटर, सरसों, अलसी और अन्य रबी एवं खरीफ फसलों पर लागू होगी।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बिहार के किसानों के लिए एक बड़ा सहारा बनेगी। बाढ़ जैसी आपदाओं के समय यह योजना उन्हें वित्तीय सुरक्षा देगी और अगली फसल की तैयारी में मदद करेगी। सरकार की यह पहल किसानों की आर्थिक स्थिति को सशक्त बनाने और कृषि को सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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